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"पृष्ठभूमि और परम्परा-
सुरसरि गंगा एवं यमुना के मध्य अंतर्वेद की भूमि पर स्थित उत्तर प्रदेश का जनपद फतेहपुर अनेक ऐतिहासिक   घटनाक्रमों, अध्यात्म और संस्कृति की साझा परम्पराओं तथा आधुनिकता के बदलते प्रतिमानों व मूल्यों को अपने में समाहित किये है l  इसी फतेहपुर जनपद में उच्च शिक्षा की परम्परा को प्रारंभ करने का श्रेय सुप्रसिद्ध समाजसेवी, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व भूतपूर्व विधायक बाबू वंशगोपाल, एडवोकेट को जाता है, जिनके सद्प्रयासों से सन १९६१ में इस महाविद्यालय की शुरुआत हुई l
महाविद्यालय के नवीन भवन का शिलान्यास तत्कालीन राज्यपाल एवं कुलाधिपति, उ० प्र० महामहिम डाँ० बी० गोपाल रेड्डी द्वारा  दिनांक ०१ नवम्बर १९७१ को संपन्न हुआ l  १९७२ में यह महाविद्यालय नए भवन में स्थानांतरित हो गया l  महाविद्यालय के नवनिर्मित पश्चिमीय संभाग का उदघाटन महामहिम श्री अकबर अली खां, राज्यपाल एवं कुलाधिपति, उ० प्र० द्वारा १८ अप्रैल १९७३ को किया गया l महाविद्यालय के प्रशासनिक भवन का निर्माण १९८० में पूरा हुआ l
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपूर से सम्बद्ध इस महाविद्यालय को १९८५ में उच्चीकृत करने की प्रक्रिया प्रारंभ हुई l हिन्दी  व अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर कक्षाओं का शुभारम्भ किया गया एवं यह महाविद्यालय महात्मा गाँधी स्नातकोत्तर महाविद्यालय के नाम से जाना जाने लगा l वर्तमान में महाविद्यालय में स्नातक स्तर पर हिन्दी भाषा, अंग्रेजी भाषा, हिन्दी साहित्य, अंग्रेजी साहित्य, उर्दू, राजनीति विज्ञान, अर्थशास्त्र, इतिहास तथा एम० ए० हिन्दी व अर्थशास्त्र कें अध्ययन की सुविधा प्राप्त है l स्ववित्तपोषित योजना के अन्तर्गत बी० काम ० का पाठ्यक्रम संचालित है l
महाविद्यालय के आयोग द्वारा नवनियुक्त प्राचार्य डाँ०अवधेश कुमार सिंह द्वारा किये जा रहे सकारात्मक प्रयासों के फलस्वरूप आगामी सत्र से महाविद्यालय में कई नए पाठ्यक्रम शुरू होने की संभावना है, जिसमें कृषि, पत्रकारिता एवं जनसंचार .(कंप्यूटर एप्लीकेशन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा )सम्बन्धी विश्वविद्यालय स्तर के पाठ्यक्रम शामिल हैं l

परिचय-
महात्मा गाँधी स्नातकोत्तर महाविद्यालय कानपुर से इलाहाबाद के मध्य फतेहपुर शहर से गुजरने वाले मुख्य मार्ग जी० टी० रोड पर स्थित है l लगभग ५० एकड़ के विशाल भू-भाग में फैले इस महाविद्यालय के उत्तर में स्वर्णिम चतुर्भुज (राष्ट्रीय राजमार्ग न० २ ) है, जिसे 'राष्ट्र के मानचित्र की हस्तरेखा ' कहा जा सकता है और इसके दक्षिण में एतिहासिक धरोहर मार्ग ग्रांट ट्रंक रोड (जी० टी० रोड ) है महात्मा गाँधी स्नातकोत्तर महाविद्यालय का विशाल परिसर दो भागों में विभाजित है- १. मुख्य परिसर २. पूर्वी परिसर महाविद्यालय के मुख्य और पूर्वी परिसर के मध्य लगभग २० बीघे के विशाल भूखंड में फैला हुआ जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम है, जिसका निर्माण महाविद्यालय द्वारा प्रदत्त भूमि पर किया गया है l मुख्य परिसर छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपूर से सम्बद्ध एवं राज्य सरकार द्वारा अनुदानित महात्मा गाँधी स्नातकोत्तर महाविद्यालय के मुख्य परिसर का निर्माण १९७२ में किया गया था l इसका विशालकाय प्रवेश द्वार जी० टी० रोड पर स्थित है l मुख्य परिसर के मुख्य प्रवेश द्वार से देखने पर महाविद्यालय परिसर का विहंगम दृश्य दिखाई पड़ता है दायें और बाएं तरफ क्रिकेट, हाँकी और फ़ुटबाल के खेल के बड़े-बड़े मैदानों के बीच में बनी हुई पक्की डामर सड़क से होकर मुख्य परिसर भवन तक पहुंचा जा सकता है l मुख्य परिसर भवन में प्रशासनिक खण्ड, पुस्तकालय खण्ड, अकादमिक खण्ड, प्राचार्य आवास एवं छात्र संघ भवन है l प्रशासनिक खण्ड में प्राचार्य चैम्बर, प्रशासनिक कार्यालय, लेखा अनुभाग एवं कम्प्यूटर कक्ष शामिल हैं l पुस्तकालय खण्ड में वाचनालय एवं विशाल पुस्तकालय है l महाविद्यालय के छात्र, शिक्षक और कर्मचारी इस पुस्तकालय का भरपूर लाभ उठाते हैं l अकादमिक खण्ड में बारह विशाल व्याख्यान कक्ष, हिन्दी एवं अर्थशास्त्र के स्नातकोत्तर विभाग, क्रीड़ा विभाग, इंदिरा गाँधी मुक्त विश्वविद्यालय एवं उ ० प्र० राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालयन के अध्ययन केंद्र संचालित हैं l व्याख्यान कक्ष विशाल, हवादार एवं सर्वसुविधा युक्त हैं, जहाँ छात्र-शिक्षक पठन- पाठन करते हैं तथा ज्ञान और विचार से जुडी गुत्थियाँ सुलझाते हैं l पूर्वी परिसर महात्मा गाँधी स्नातकोत्तर महाविद्यालय के मुख्य परिसर के पूर्व में जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम से सटा हुआ महाविद्यालय का पूर्वी परिसर है l महाविद्यालय का पूर्वी परिसर एक वृहद् भूखंड पर विकसित किया जा रहा है l सम्प्रति यहाँ एक विशाल भवन है, जिसमे व्याख्यान कक्ष, प्रशासनिक कक्ष, कार्यालय, पुस्तकालय आदि के लिए पर्याप्त स्थान है l कभी बी० एस० सी० भवन और बी ० ब्लाक के नाम से विख्यात इस पूर्वी परिसर भवन में सत्र २०१० - ११ से विश्वविद्यालय से सम्बद्ध स्नातक स्तर के कृषि, पत्रकारिता, जनसंचार एवं पी० जी० डी० सी० ए० पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना है l इस प्रकार से जहाँ महाविद्यालय का मुख्य परिसर कला शिक्षा का केंद्र है वहीं  पूर्वी परिसर को वाणिज्य, कृषि, पत्रकारिता, जनसंचार एवं पी० जी० डी० सी० ए० एवं अन्य व्यावसायिक शिक्षा के स्ववित्तपोषित केंद्र के रूप में विकसित जा रहा है l ग्यारहवीं पंच वर्षीय योजना (२००७ - २०१२) हेतु महाविद्यालय के स्नातक विभागों के विकास के लिए लगभग ९५००० लाख रूपये के अनुदान विश्वविधालय अनुदान आयोग, नई दिल्ली द्वारा स्वीकृत किये गये हैं l दोनों स्नातकोत्तर विभागों में पीएच० डी० की सुविधा उपलब्ध है l लगभग १५ छात्र महाविद्यालय के विद्वान प्राध्यापकों के निर्देशन में इस सुविधा का लाभ उठा रहे हैं l क्रीड़ा विभाग की ओर से क्रिकेट, हाँकी, बैडमिन्टन, बालीबाल, टेबल-टेनिस, शतरंज, एथलेटिक्स आदि खेलों की व्यवस्था सुचारू रूप से चल रही है l शैक्षिक सत्र २०१० - ११ से स्ववित्तपोषित योजना के अन्तर्गत (पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन कंप्यूटर एप्लीकेशन ), कृषि विज्ञान, पत्रकारिता एवं जनसंचार विषयों को प्रारंभ किया जाना प्रस्तावित है l

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